Categories Shivangi Saxena

विवाह और विवशता

17  बरस की थी जब मेरा विवाह दिल्ली के किसी परिवार के साथ मुझसे बिना पूछे तय कर दिए गया । यूँ तोह मेरा आगे  आगे पढ़ने लिखने का विचार था परन्तु घर मे लड़कियों की सुनता कौन है । जब मैंने अपने आगे पढ़ने की बात घर मे सबको बताई तोह भाई ने मुझे […]

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किन्नर और वैश्यावृत्ति

मैंने चाँद को सूरज निगलते देखा है सिक्कों की खनक पर ज़िंदा लाशों को बिकते देखा है। कीचड मे पैर रखो तोह छीटे तुमपर ही गिरती है। वेश्यावृत्ति को भारत मे कानूनी रूप से मंज़ूरी ज़रूर मिल गयी हो परन्तु समाज के भीतर एक वेश्या का स्थान काले अक्षरों मे ही लिखा मटमैला रचित है। […]

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