Categories Shivangi Saxena

किन्नर और वैश्यावृत्ति

मैंने चाँद को सूरज निगलते देखा है सिक्कों की खनक पर ज़िंदा लाशों को बिकते देखा है। कीचड मे पैर रखो तोह छीटे तुमपर ही गिरती है। वेश्यावृत्ति को भारत मे कानूनी रूप से मंज़ूरी ज़रूर मिल गयी हो परन्तु समाज के भीतर एक वेश्या का स्थान काले अक्षरों मे ही लिखा मटमैला रचित है। […]

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